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Jun 14, 2016

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Jun 13, 2016

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latest indian maal chudai कयामत ढाने वाली कमाल की माल मैं अपनी नसीब की ठकर Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex top indian sex stories 2016 collections से मजबूर एक साला कमीना अभागी लड़का, जो हमेशा लड़कियों और औरतों पर अपनी एक पैनी नज़र रखता है! & #2350;ौका मिले तो उन्हें कभी नहीं छोड़ता, लेकिन किसी के दिल के साथ मैं नहीं खेलता, और उनके दिल को ठेस नहीं पहुचाता! ऐसे ही एक बार मैं अपने दोस्त के घर गया! हम…

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Jun 12, 2016 / 1 note

hindi long drive sex in car लम्बी ड्राइविंग पे सेक्स का मज़ा

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Hindi dancing car Sex Stories  . long drive sex in car . gf ki car meh chudai ki kahani Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मैं अपने प्रेमी का इंतज़ार कर रही थी जैसा की मैंने पिछले भाग में लिखा था की मैं अपने चोदु चाच ;ा के साथ ITALY जाने वा ली थी और मेरा प्रेमी रमेश भी देल्ली जाने वाला था क्यों की वहां उस की नौकरी लग गई थी.

कुछ दिनों के लिए अलग होने से पहले हम ने एक लम्बी drive पर जाने का फैसला किया था. आ 46; तो जानतें है की इसका मतलब क्या है.

वो बरसात का मौसम था और रुक रुक कर बरसात हो रही थी. मैंने समय देखा तो उस वक़्त दोपहर के ३.३० बजे थे. रमेश के आने में अभी भी एक घंटे की देर थी. मैं तो & #2330;ुदाई के लिए इतनी बेचैन थी की एक घंटे पहले ही तैयार हो गई थी. मैं जीन और टॉप पहने हुए थी. मैंने अपने आप को आईने में देखा. भगवान ने मुझे बहुत ही सुन्दर बनाया है. मेरा बदन सेक्सी और फ 367;गर तो मर्दों की जान लेने वाला है. मेरा नाप ३४ – २६ – ३६ है. गोल चेहरा, गोरा रंग, काले बाल और नीली आँखें. मैंने देखा है की लोग, चाहे मर्द हो या औरत, मैं जब भी बाहर जाती हूँ, मुझको ही देखत ;ें रहतें हैं. मुझे पता है की जब भी मैं चलती हूँ, मेरी गोल गोल गांड बहुत ही प्यारे सेक्सी अंदाज़ में मटकती है और मेरी तानी हुई चूचियां तो सोने पर सुहागा है जो किसी भी मर्द को पागë 4; बना देने के काबिल है. और सब से खास बात, मैं हमेशा ही अच्छे, मेरे सेक्सी बदन को सूट करने वाले कपडे पहनती हूँ. मैं अपना बदन ज्यादा नहीं दिखाती, पर जितना भी दिखता है, आप समझ सकतें है क ;ी क्या होता होगा. मैं मन ही मन मुस्करा देती हूँ जब मर्द लोग चुदाई की भूख अपनी आँखों में लिए और लड़कियां, औरतें जलन से मुझको देखती हैं. मैं भगवान को हमेशा बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ की उस ने मुझे इतना सुन्दर बनाया और मैं हमेशा अपने शरीर का ध्यान रखती हूँ. मैं रोज़ योग करती हूँ और जरूरी कसरत करती हूँ ताकि मेरा बदन हमेशा ऐसा ही रहे. बहुत से लोग, मेरे परिवì 6;र वाले भी और दोस्त लोग कहतें हैं की मैं फिल्मों में काम कर सकती हूँ पर मुझे कोई interest नहीं है फ़िल्मी हीरोइन बनने में. मैं तो अपने चाचा की और अपने प्रेमी की असली हीरोइन हूँ.

खैर, मै 306; अपनी सुन्दरता का वर्णन ज्यादा न करके, असली कहानी पर आती हूँ.

रमेश के आने में अभी वक़्त था तो मैं टाइम पास करने के लिए अपने घर की छत पर आ गई. छत का एक भाग छप्पर बना कर कवर कि या हुआ  341;ा ताकि बरसात और धूप से बच कर वहां बैठा जा सके. मैं एक कुर्सी पर बैठ गई और मैंने इधर उधर देखा. हमारा घर आस पास के सारे घरों से ऊंचा है और हमारी छत से हम दूर तक देख सकते थे. अचानक मेरी &# 2344;जर पड़ोस के घर की तरफ गई. वो एक डॉक्टर का घर था. अपनी पत्नी के गुजर जाने के बाद डॉक्टर वहां अकेला रहता था. उस का लड़का विदेश में पढता था. डॉक्टर की उम्र उस समय करीब ४५/५० की होगी. वो & #2408; बजे तक अपनी क्लिनिक में बैठता था जो की उस के घर के आगे के हिस्से में थी. एक सुन्दर और जवान औरत दिन में वहां आती थी जो की डॉक्टर के लिए खाना बनती थी, घर का दूसरा काम करती थी. मैं हमे& #2358;ा सोचती थी की वो औरत केवल डॉक्टर का घर ही नहीं संभालती थी, बल्कि डॉक्टर को भी संभालती थी. मतलब, वो औरत बिना पत्नी के डॉक्टर से जरूर ही चुदवाती होगी.

मैंने दोनों को, डॉक्टर को और कामवाली औरत उनके घर के अन्दर के कमरे में देखा जिसका दरवाजा खुला था और मुझे सब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. डॉक्टर कुर्सी पर बैठा कुछ पढ़ रहा था और कामवाली कमरे की सफाई कर रही थी. é 7;ॉक्टर ने उसको कुछ कहा तो वो काम छोड़ कर आलमारी की तरफ गई और मैंने देखा की उस के हाथ में कुछ कपडे थे. उन कपड़ों को लेकर वो कमरे के अन्दर ही बाथरूम में चली गई. जब वो थोड़ी देर बाद वाप स आई तो मैंने देखा की वो एक बहुत सुन्दर, गुलाबी रंग की ब्रा और चड्डी पहने हुए थी. शायद ये डॉक्टर की तरफ से कामवाली को तोहफा था और जरूर ही डॉक्टर ने उसको पहन कर दिखने को कहा था. वो ए&# 2325; टक उस को देख रहा था. जैसा की मैंने लिखा है की कामवाली सुन्दर थी, उस की भरी भरी चूचियां और भारी गांड उस गुलाबी रंग की ब्रा और चड्डी में बहुत सेक्सी लग रही थी. वो बातें कर रहे थे और  357;ो डॉक्टर की तरफ बढ़ी. दोनों आपस में होठों का चुम्बन करने लगे और मेरा सोचना ठीक था की दोनों में चुदाई का रिश्ता था. मेरे लिए उन को देखना टाइम पास करने का अच्छा साधन था. वो दोनों अ& #2354;ग हुए और उस ने फिर से कमरे की सफाई करनी शुरू करदी. मैंने सोचा की शायद इतना ही होगा, पर मैं गलत थी. हलकी हलकी बरसात फिर से शुरू हो गई थी. वो अपनी सेक्सी कामवाली को ब्रा और चड्डी पहन 375; काम करते देखता रहा और वो बातें करते रहे. जब वो उस के करीब से गुजरी तो डॉक्टर ने उस की भरी भरी चुचियों को दबा दिया. वो हंस पड़ी. अब डॉक्टर ने उस के पैरों के बीच हाथ डाल कर कुछ किया त 379; वो हवा में उछल पड़ी. जरूर डॉक्टर ने कामवाली की चूत में या गांड में ऊँगली की थी. वो उसकी तरफ देखती हुई फिर से हंस पड़ी. वो उस के पास आ कर खड़ी हुई तो डॉक्टर ने बैठे बैठे उस को कस कर प&# 2325;ड़ लिया. वो खड़ी थी वो प्यार से डॉक्टर के सिर के बालों में हाथ फिरा रही थी. डॉक्टर का सिर उस की भरी भरी चुचियों के बीच था और वो अपना चेहरा उस की चुचियों पर ब्रा के ऊपर से रगड़ रहा  41;ा. उस के हाथ उस की मोटी गांड को दबा रहे थे. उसने अपने हाथ से अभी अभी कामवाली को तोहफे में दी गई ब्रा की दोनों पट्टियाँ, बिना हुक खोले, उस के कंधे से नीचे करदी. कामवाली ने अपने हाथ नì 8;चे करके ब्रा की पट्टियों से निकाल लिए और डॉक्टर ने उसकी ब्रा को नीचे पेट की तरफ करके उस की चुचियों को नंगा कर दिया. उस की गुलाबी ब्रा उसकी गुलाबी चड्डी से मिल रही थी और उस की बड 64;ी बड़ी चूचियां डॉक्टर के सामने थी डॉक्टर कामवाली की नंगी चुचियों पर अपना चेहरा रगड़ रहा था और उस ने उसकी एक निप्पल अपने मुंह में ले ली. उन लोगों की गर्मी मुझ में भी आने लगी. मे 52;ी चूत में भी उन को देख कर हलचल मचने लगी. वो एक के बाद कामवाली की चूचियां और निप्पल किसी भूखे की तरह चूसता जा रहा था. कामवाली का सिर भी चूचियां चुसवाते हुए आनंद से आगे पीछे हिल raha थ 66;. मैं उन को देख कर मज़ा ले रही थी और आप तो जानतें ही है के मैं कितनी सेक्सी हूँ और जो मैं देख रही थी वो मुझे उत्तेजित करने के लिए काफी था. मेरी जीन के अन्दर मेरी चड्डी गीली होने लगी ; और अपने आप ही मेरी उँगलियाँ मेरी जीन के ऊपर से ही जहाँ मेरी चूत थी, वहां पर फिरने लगी.

वो दोनों कुछ ऐसी पोजीसन में थे की मैं कामवाली का चेहरा नहीं देख पा रही थी. डॉक्टर कुर्सी प 52; दरवाजे की तरफ मुंह करके बैठा हुआ था और मैं डॉक्टर का मुंह और कामवाली की गांड देख पा रही थी. अब कामवाली नीचे बैठ गई थी और डॉक्टर ने अपनी पेंट की जिप खोली तो कामवाली ने अपने हाथ स&# 2375; उसका लौड़ा पकड़ कर बाहर निकाल लिया. मैं इतनी दूर थी, फिर भी मैंने साफ़ साफ़ देखा की डॉक्टर का लंड काफी बड़ा था और उस के चरों तरफ काले काले बाल थे. कामवाली अपने हाथों से उस की झां ;टों को पीछे कर रही थी ताकि वो उसके काम के बीच में न आयें. कामवाली ने डॉक्टर के काले और बड़े लौड़े को चूमा और उस को धीरे धीरे हिलाने लगी. डॉक्टर अपनी कुर्सी पर पीछे सिर टिका कर बै 36; गया और अपने लंड पर कामवाली के कमाल का मज़ा लेने लगा. थोड़ी देर उसका लंड हिलाने के बाद उस ने लंड का सुपाडा अपने मुंह में ले कर कुछ देर टक चूसा. फिर, वो उस के लंड को पकड़ कर मुठिया मì 6;रने लगी जब की डॉक्टर के लौड़े का सुपाडा उस के मुंह में ही था. मुझे पता चल चुका था की वहां शायद लंड और चूत की चुदाई नहीं होने वाली है, सिर्फ हाथ का कमाल ही होगा.

मैंने भी अपनी जीन क& #2368; जिप खोल ली और चड्डी के किनारे से अपनी बीच की ऊँगली, अपने पैर चौड़े करके अपनी चूत टक ले गई. मैंने जल्दी जल्दी अपनी ऊँगली अपनी चूत के दाने पर फिरानी चालू की ताकि मैं जल्दी से झड़ सकूँ. और वहां, कामवाली तेजी से, डॉक्टर का लौड़ा चूसते हुए मुठ मार रही थी. मेरी ऊँगली की रफ़्तार भी मेरी चूत में बढ़ गई थी.

मैंने देखा की डॉक्टर की गांड कुर्सी से ऊपर हो रही है और  309;चानक ही उस ने कामवाली का सिर पकड़ कर अपने लंड पर दबा लिया. जरूर की उस के लंड ने अपना पानी छोड़ दिया था. कामवाली मज़े से डॉक्टर के लंड रस को पी रही थी. मेरी चूत पर मेरी ऊँगली के काम  60;े मैं भी अब झड़ने के करीब थी. मैंने अपनी ऊँगली तेजी से अपनी गीली फुद्दी पर हिलानी शुरू करदी और मैं भी अपनी मंजिल पर पहुँच गयी. मेरी चड्डी मेरे चूत रस से और भी गीली हो गई. मैंने एक शानदार काम, चूत में ऊँगली करने का ख़तम किया. मेरी आँखें आनंद और स्वयं संतुस्ती से बंद हो गई.

जब मैंने आँखें खोली तो देखा की कामवाली डॉक्टर का लंड, अपना मुंह, अपनी गर्दन और अपनी चूचियां कपडे से साफ़ कर रही थी. शायद डॉक्टर के लंड का पानी उस के बदन पर भी फ़ैल गया था.

तभी मैंने रमेश की नीली जेन को अपने घर की तरफ आने वाली सड़क पर देखा. बरसात अब रुक चुकी थी. मैं & #2326;ड़ी हुई और अपने कमरे की तरफ दौड़ी. मैंने दूसरी चड्डी ली और अपनी गीली चूत tissue पेपर से साफ़ करने के बाद उस को पहन लिया.

मैं जल्दी से अपने प्रेमी का स्वागत करने नीचे आई. वो अपनी कार प ार्क करने के बाद घर के अन्दर आया तो मेरी माँ भी आ गई थी. हम सब ने साथ साथ शाम की चाय पी और हल्का नाश्ता किया. वो ज्यादातर मेरी माँ से ही बात करता रहा और करीब ५.०० बजे हम अपने बनाये हु ए प्रोग्राम पर रवाना हुए.

हम गोवा – मुंबई हाइवे पर थे और फिर से बरसात शुरू हो गई थी, इस बार जोर से. तेज बरसात के कारण बाहर अँधेरा हो गया था. मैं अपना सिर उसके कंधे पर रख कर बैठी हुई & #2341;ी और बाहर हो रही बरसात मुझे सेक्सी बना रही थी, गरम कर रही थी. वो बहुत सावधानी से कार चला रहा था. रस्ते पर बहुत कम वाहन थे,

उस ने मेरे गाल पर चुम्बन लिया तो मैं अपना आपा खोने लगी. मै&# 2306;ने भी उस के गाल को चूमा. गाडी चलते हुए उस ने मेरी चुचियों को दबाया. मैं जो चाहती थी, वो हो रहा था. उस ने फिर एक बार मेरी चुचियों को दबाया और मसला, इस बार जरा जोर से. चलती गाडी में जितन ा संभव था, उतना मैं उस से चिपक गई. अब मेरी चूचियां उस के हाथ पर रगड़ खा रही थी. मैंने उस के शर्ट के ऊपर का बटन खोल दिया. मेरी उँगलियाँ उस की चौड़ी, बालों भरी छाती पर, उस की मर्दाना निप ;्पल पर घूमने लगी. मैंने महसूस किया की उसकी निप्पल मेरे सेक्सी तरीके के कारण कड़क हो गई थी. मैंने एक के बाद एक, उसकी दोनों निप्पलों को मसला तो उसको मज़ा आया. मैंने नीचे देखा तो पì 6;या की उस की पेंट के नीचे हलचल हो रही थी. मैंने मुस्कराते हुए उस की निप्पल को छोड़ कर अपना हाथ नीचे ले गई. मेरा एक हाथ उस की गर्दन के पीछे था और मेरी चूचियां अभी भी उसके हाथ पर रगड़ खा रही थी. मेरा दूसरा हाथ उस की पेंट के ऊपर, उसके तने हुए लंड पर था. उस ने अपने परों की पोजीसन ऐसी बना ली की वो कार चलता रहे और मैं उस के लौड़े से खेलती रहूँ. मैं उस का खड़ा हुआ लंड मसë 4; रही थी और उस को बाहर निकालना चाहती थी. मैंने उस की जिप खोली तो उस ने भी अपने खड़े हुए लंड को चड्डी से बाहर निकालने में मेरी मदद की.

कितना सुन्दर लंड है मेरे प्रेमी का. गहरे भूरे &# 2352;ंग का, करीब 7 / 7.5 इंच लम्बा, 3 इंच मोटा और कड़क लंड. ( मैंने उस के लंड को नापा था जब हम एक बार अलग अलग तरीके ले लौडों के बारे में बात कर रहे थे. इसीलिए मुझे उस के लंड का नाप मालुम है.) गरम, शख्& #2340; और मज़बूत. उस के लंड के सुपाड़े पर चमड़ी है और और सुपाड़े पर छेद बहुत प्यारा लगता है. मुझे हमेश ही उसके मर्दानगी भरे लंड को देखना अच्छा लगता है. मैं बहुत भग्यशाली हूँ की मुझे ऐ सा प्रेमी मिला है जो मेरी तरह हमेशा, कहीं भी, कभी भी, प्यार और चुदाई का खेल खेलने को तैयार रहता है. उस लंड की ऊपर की चमड़ी बहुत आसानी से नीचे हो जाती है, जब मैं उस के खड़े लंड को पकड़ कर नीचे दबाती हूँ. उस का गुलाबी सुपाडा मेरी आँखों के सामने आ जाता है. उस के लंड के सुपाड़े पर, छेद पर पानी की एक बूँद आ गई थी जो की आप जानतें है ये चुदाई के पहले का पानी है. उस ने भी क 66;र चलते हुए मेरी चूत पर मेरी जीन के ऊपर से ही हाथ फिराया जिस से मेरी गर्मी बढ़ने लगी और हमेश की तरह मेरी चूत ने भी रस निकालना चालू कर दिया. मुझे पता है की रमेश का कार चलाने पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है और वो कार चलाने में बहुत ही माहिर है. इसलिए मैं चलती कार में उसके साथ चुदाई का खेल खेलते समय चिंता नहीं करती जब वो कार चला रहा होता है. मैंने धीरे से उस के ; खड़े लंड को पकड़ कर हिलाया, जैसे वो कामवाली डॉक्टर का हिला रही थी. मेरे छूने से उस का कड़क लौड़ा और भी सख्त हो गया. बाहर हो रही बरसात हमारी भावनाओं को भड़का रही थी और हम चलती कार &# 2350;ें हमारा पसंदीदा काम करने लगे. मैंने रमेश की आँखों में देखा तो उन में मेरे लिए प्यार के सिवाय कुछ और नहीं था. मैंने उस के लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करना शुरू किया. कुछ समय बाद मैंन े अपना सिर नीचे करके उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुंह में लिया. मैं अपनी जीभ उस के लंड मुंड पर घुमा कर उस के पानी का स्वाद लिया. उस का लंड चूसते हुए भी, चलती कार में मेरा मुठ मारन&# 2366; लगातार चालू था. मुझे पक्का था की कोई भी बाहर से नहीं देख सकता था की अन्दर चलती कार में हम क्या कर रहें है. कार के शीशे गहरे रंग के थे और बाहर बरसात होने की वजह से वैसे भी अँधेरा थ 66;. बाहर बरसात और तेज होने लगी थी जो कार में हम दोने को गरम, और गरम, सेक्सी बना रही थी. मैं एक बार तो घर पर डॉक्टर और उसकी कामवाली को देख कर अपनी चूत अपनी ही ऊँगली से चोद चुकी थी, और अब म& #2376;ं चाहती थी की लंड और चूत के मिलन से पहले उस के लंड को भी हिला हिला कर, मुठ मार कर उसके लंड का रस भी निकाल दूँ. कार की छोटी जगह में झुक कर उस के लंड को चूसने में तकलीफ हो रही थी क्यों क ;ी हिलने जगह बहुत ही कम थी. उस ने भी इस बात को समझा और मैं सीधी हो कर बैठ गई. उस ने फिर मेरी चुचियों को मसला और दबाया, मेरी चूत पर हाथ फिराया. मैंने बैठे बैठे उस के लंड को कस कर पकड़ा औ 52; शुरू हो गई जोर जोर से मुठ मारने का काम करने को. वो भी बार बार मेरी चुचियों से खेल रहा था, दबा रहा था, मसल रहा था और मेरी चूत पर भी हाथ फिरा रहा था. चुदाई की, सेक्स की गर्मी बढती गई. हम द ;ोनों को ही मज़ा आ रहा था. मैं सोच रही थी की उस के लंड का पानी जब निकलेगा, तब कार में, उस के कपड़ों पर फ़ैल जाएगा. मुझे पता है की उस का लंड, बहुत दूर तक, बहुत तेजी से और बहुत सारा पानी नि&# 2325;ालता है. मैं अपना मुठ मारने का काम कर रही थी और उस ने कार में पड़ा छोटा तौलिया अपने हाथ में ले लिया. मैं समझ चुकी थी की ये लंड से निकलने वाले पानी को फैलने से रोकने के लिए है. वो का 352; चला रहा था और मैं उस के लंड पर मुठ मार रही थी. मुठ मारते मारते मैंने उस के लंड में और ज्यादा शाख्ती महसूस की तो मुझे पता चल गया की उस का पानी निकलने वाला है. एक हाथ से वो ड्राइव कर  352;हा था और एक हाथ में अपने लंड के पास तौलिया पकड़े हुए था.

अचनक उसके मुंह से निकला “ऊऊह जुलीईईईईईए” और उसने तौलिया अपने लंड के मुंह पर रखा. मैंने जल्दी से तौलिया पकड़ कर उस के ल 06;ड पर लपेट दिया और फिर से उस के लंड को तौलिये के ऊपर से पकड़ लिया. उस का लंड पानी छोड़ने लगा जो तौलिये में जमा होता जा रहा था. पानी निकालते हुए उस का लंड मेरे हाथ में नाच रहा था. मैं  13;स के लंड को टाईट पकड़े रही. उस के चेहरे पर संतोष के भाव थे और मैं खुस थी की मैंने अच्छी तरह से मुठ मार कर उस के लंड को शांत किया था. मैंने तौलिये से उस के लंड को साफ़ किया और फिर उसन 75; अपने लंड के पानी से भीगा हुआ तौलिया चलती कार से बाहर गीली सड़क पर, थोड़ी से खिड़की खोल कर फ़ेंक दिया. जब उसने खिड़की खोली थी तो पानी की कुछ बूँदें अन्दर आई, हमें अच्छा लगा. उस का लंड अभी भी आधा खड़ा, आधा बैठा था. न ज्यादा कड़क, न ज्यादा नरम. आप जानतें है की हमेशा ही खड़े लंड को थोड़ी कोशिश के बाद चड्डी और पेंट से बाहर निकाला जा सकता है, पर खड़े लंड को वापस चड& #2381;डी और पेंट में डालना मुश्किल है. नरम लंड को आसानी से वापस कपड़ों के अन्दर डाला जा सकता है. उस ने वापस अपना नरम लंड अपनी जिप के अन्दर, पेंट में, चड्डी में डाल लिया.

करीब 6.30 हो चुके थ े और हम हमारे घर से करीब १०० KM दूर थे. अभी भी भारी बरसात हो रही थी और बहार बहुत अँधेरा हो गया था और हमारी कार चली जा रही थी. मैंने रमेश से पूछा की क्या प्रोग्राम है तो उस ने बताया की è 5;ोई 30 की.मी. आगे एक रेसोर्ट है और उस का प्रोग्रामे वहां जाने का था पर अब, जबकि मौसम ऐसा है तो क्यों न कार में ही चुदाई की जाए.

मैं मान गई कार में चुदवाने को क्यों की मैंने कभी कार मेæ 6; नहीं चुदवाया था. भी कार में चुदवाने का अनुभव लेना चाहती थी. मुझे हमेशा अलग अलग पोजीसन में, अलग अलग जगह में चुदवाने में बहुत मज़ा आता है. मैंने उस से पूछा की कैसे हम हाइवे पर कार &# 2350;ें चुदाई कर सकतें है तो उसने मुस्करा कर जवाब दिया ” अगर मैं तुम को हाइवे पर कार में चोदूंगा तो इस मौसम और अँधेरे में कोई मेरी कार की पीछे से गांड मार देगा.” मैं उसकी बात सुन कर ह ंस पड़ी.

कोई 2 / 3 किमी आगे आने के बाद उस ने कार हाइवे से नीचे उतार कर पेड़ों के झुण्ड की तरफ बधाई. आखिर उस ने कार वहां खड़ी की जहाँ चारों तरफ घने पेड़ थे. मैंने देखा की हमारी कार दो बé 7;़े पेड़ों के बीच खड़ी थी. हम हाइवे से ज्यादा दूर भी नहीं थे. बाहर चारों तरफ पानी भरा था. बड़े बड़े पेड़ों के बीच हमारी ब्लू रंग की कार को इस मौसम में और अँधेरे में हाइवे से देख पा&# 2344;ा संभव नहीं था. ये एक बहुत महफूज़ जगह थी पहली बार कार में चुदाई करने के लिए. भारी बरसात लगातार हो रही थी और हम बड़ी बड़ी पानी की बूंदों को हमारी कार की छत पर गिरते हुए सुन सकते थे ;.

रमेश मेरी तरफ घूमा और बोला ” डार्लिंग! क्या तुम इस सेक्सी मौसम में कुछ बीअर पीना चाहोगी? ”

” जरूर. क्या कार में है बीअर ?.” मैंने पुछा.

उस ने पिछली सीट से एक थैली उठाई जिसमे कुछ FO STER BEER CANS थे. उस ने एक कैन खोल कर मुझे दिया और एक अपने लिए खोल लिया.

“चीअर्स” हम ने एक साथ बोला और धीरे धीरे बीअर पीने लगे.

मैं – कार में कैसे करेंगे ? पिछली सीट पर?

रमेश – पिछली सीट पर कर & #2360;कतें है पर इस छोटी कार में जगह बहुत कम है. मैं सोच रहा हूँ की क्यों न आगे की सीट पर किया जाए जिस पर तुम बैठी हो. हम सीट को पीछे करके जगह बना सकतें है.

मैं – इस सीट पर? कैसे होगा इतनी क ;म जगह में?

रमेश – ठीक है. हम यहाँ शुरू करतें है. अगर जरूरत हुई तो पिछली सीट पर चले जायेंगे. मैं कुछ बता नहीं सकता क्यों की मैंने कार में कभी नहीं किया है. आज पहली बार है.

मैं – मेरा भी तो पहली बार है. ठीक है. हम पहली बार ट्राई करतें हैं साथ साथ.

हम बीअर पी रहे थे और बाहर का बरसाती मौसम हमारे तन बदन में आग लगा रहा था. एक तो हम दोनों वैसे ही स्वभाव से सेक्सी है और ऊपर से ये मौसम. हम दोनों ही जानते है की समय और जगह कैसे सही इस्तेमाल किया जाता है. हम लोग सेक्सी बातें कर रहे थे और कार में, हाइवे के पास और बरसात के मौसम में एक मजेदार चुदाई के लि 319; तैयार हो रहे थे. वहां, पेड़ों के बीच कार में बैठे बैठे हम को हाइवे पर आती जाती गाड़ियों की रौशनी दिखाई दे रही थी पर हमें पता था की कोई भी हम को देख नहीं पायेगा. हमने बीअर का एक एक  25;ैन ख़तम किया और फैसला किया की चुदाई होने के बाद, वापस जाते समय बीअर पीने का दूसरा दौर चलाएंगे. जगह बनाने के लिए उस ने मुझे मेरी सीट पीछे करने को कहा. मैंने सीट पेचे की तो वो करीब & #2325;रीब पीछे की सीट को छू गई. अब मेरी सीट के सामने काफी जगह हो गई थी. मैं अभी भी सोच रही थी की इस सीट पर वो मुझे कैसे चोदेगा. अब मैंने सीट की पीठ को पीछे धकेला तो मैं अधलेटी पोजीसन में ह& #2379; गई.

वो बोला – डार्लिंग! हम केवल अपने नीचे के कपड़े ही उतारेंगे ताकि हम आराम से चुदाई कर सकें. अगर अचानक कोई आ गया तो ऊपर के कपड़े पहने होने की वजह से हम नंगे नहीं दिखेंगे.

मैं उ ;स की बात समझ कर मान गई, हालांकि चुदवाते समय मुझे शरीर पर कपड़े बिलकुल भी पसंद नहीं है. पर मैं मौके की नजाकत को समझ रही थी, इस लिए ऊपर के कपड़े बदन पर रख कर चुदवाने को राज़ी हो गई.

उ& #2360;ने अपनी पेंट और चड्डी उतार कर पिछली सीट पर फ़ेंक दी. अब केवल वो अपनी शर्ट पहने हुए था. मैंने देखा की उस का लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था जैसे उस में हवा भरी जा रही थी. उसका लंड लम्ब 366; होता जा रहा था, मोटा होता जा रहा था और ऊपर की और उठ रहा था. मैंने भी अपनी जीन और चड्डी उतार कर पिछली सीट पर उस के कपड़ों पर फ़ेंक दिए. अब मैं भी ऊपर केवल अपना टॉप पहने हुए थी और नीचे & #2360;े हम दोनों नंगे थे. उसने कार की ड्राइविंग सीट भी पीछे करदी ताकि थोड़ी और जगह हो जाए. मेरा बहुत मन हो रहा था की वो मेरी चुचियों को चूसे, पर मैं समझ रही थी की हम किसी बंद कमरे में नह 368;ं है. और मैं अपनी चूत, अपनी गांड और अपनी चूचियां किसी और को नहीं दिखाना चाहती थी.

उस ने शायद मेरी आँखों को पढ़ लिया था. वो बोला – ” जूली ! एक काम करो. मैं जिस तरह चुदाई करने की सोच रह&# 2366; हूँ, उस में मैं तुम्हारी चूचियां चोदते वक़्त नहीं चूस पाऊँगा. पर मैं तुम को चुदाई का पूरा पूरा मज़ा देना चाहता हूँ और साथ ही खुद भी पूरा मज़ा लेना चाहता हूँ. तुम अपनी ब्रा का ह& #2369;क खोल लो और अपने टॉप के नीचे के दो बटन भी खोल लो. इस तरह तुम्हारी चूचियां नंगी भी रहेगे और ढकी हुई भी रहेंगी. मौके का फायदा उठा लेंगे. “

मैं उस की बात सुन कर खुस हो गई. हम दोनों ही ज& #2366;नते है की चुदवाते समय मुझे अपनी चूचियां और निप्पल चुस्वाना बहुत पसंद है. मैंने वैसा ही किया जैसा उस ने कहा. मेरी चूचियां अब मेरे टॉप के नीचे से चुसवाने को तैयार थी.

अब टक उसक 366; गरम लंड पूरी तरह तन कर चूत से मिलने को तैयार हो गया था. मैं जानती थी की मेरी चुदाई बहुत देर टक होने वाली है क्यों की चाचा की तरह रमेश भी चुदाई के मामले में बहुत मज़बूत है और बहुत देर चोदने के बाद उस के लंड का पानी निकलता है. और ऊपर से मैंने अभी कुछ देर पहले मुठ मार कर एक बार उसके लंड रस को निकाल दिया था तो और भी ज्यादा वक़्त टक चोदने वाला है मुझे.

खैर, अब वक& #2364;्त आ गया था असली चुदाई का. मैंने उस के खड़े हुए लंड को पकड़ा तो वो हमेशा की तरह बहुत गरम था. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की मेरे प्रेमी का लौड़ा इतना मज़बूत, इतना लम्बा, इतना मोटा और ç 1;तना गरम है. मैं तो कहती हूँ की ये लौड़ा नहीं, चोदने की मशीन है. चुदाई की शुरुआत हमने हूथों के चुम्बन से की. हम एक दुसरे के गरम, रसीले होंठ चूसने लगे. होठों के चुम्बन से चुदाई की आग औ ;र भी भड़क गई. उस ने मुझे अपने ऊपर खींच तो मेरे हाथ उस की गर्दन के पीछे और उस के हाथ मेरी गोल गोल, कड़क गांड पर फिरने लगे. मेरी चूत में खुजली होने लगी और वो गीली होने लगी. वो मेरी गंद ê 2;बा रहा था और अपनी उँगलियाँ मेरी गांड की गोलियों के बीच की दरार में घुमा रहा था. मैं और भी गरम होने लगी. रमेश ये अच्छी तरह जानता है की कम समय में मुझे कैसे गरम किया जाता है और वो वह& #2368; काम एक बार फिर कर रहा था. मेरी जीभ को अपने मुंह में ले कर उसने आइस क्रीम की तरह चूसा, चुभलाया. उस के हाथ लगातार मेरी नंगी गांड पर घूम रहे थे. उसकी उन्ग्की मेरी गांड पर घुमती हुई थ 379;ड़ी से मेरी गांड में घुसी तो मैं उछल पड़ी. जब उस ने अपनी ऊँगली मेरी गांड में अन्दर बहर हिलाई तो मज़ा ही आ गया. हाइवे पर गाड़ियाँ आ जा रही थी और कोई भी हम को देख नहीं सकता था. हमारी  25;ार पेड़ों के बीच में थी और हम दो जवान प्रेमी उसमे चुदाई का मज़ा ले रहे थे, बिना किसी की नज़र में आये. आप जानतें है की इस से पहले मैंने कई बार चलती हुई कार में अपने हाथ और मुंह का कम ;ाल उसके लंड पर दिखाया था, बिना किसी की नज़र में आये और ये पहला मौका था जब हम पूरी चुदाई कार में करने वाले थे, उसी तरह, बिना नज़र में आये. मैंने उस का तना हुआ, चुदाई के लिए तैयार लंड प ;कड़ कर उसके मुंह की चमड़ी नीचे की तो उसके लौड़े का गुलाबी सुपाडा बाहर आ कर चमक उठा. हमने चुम्बन ख़तम किया और मैं अपनी सीट पर बैठ कर लम्बी लम्बी साँसे लगी. us के हाथ पकड़ कर मैंने उ&# 2344;को अपनी चुचियों पर रखा तो वो मेरी चुचियों को मेरे टॉप के ऊपर से दबाने लगा. उस का लंड अभी भी मेरी पकड़ में था. उस ने अपना मुंह मेरी चुचियों टक लाने के लिए अपनी पोजीसन बदली और मेरे टॉप के नीचे का भाग ऊपर किया तो मेरी तनी हुई दोनों सेक्सी चूचियां उस के चेहरे के सामने थी. मेरी गहरे भूरे रंग की निप्पल तन कर खड़ी थी, एक निप्पल को उस ने अपने मुंह में लिया और दूस 52;ी को अपनी उँगलियों के बीच में. मेरी एक निप्पल को किसी भूखे बच्चे को तरह चूस रहा था और दूसरी निप्पल को किसी शैतान बच्चे की तरह मसल रहा था. मेरी फुद्दी अब टक पूरी गीली हो चुकी थी औ&# 2352; उस में चुदवाने के लिए खुजली हो रही थी. इस पोजीसन में मैं उस के लौड़े को देख नहीं पा रही थी पर वो अभी भी मेरे हाथ में था और मैंने उस को भी थोड़ा पानी छोड़ते हुए महसूस किया. यानि वो  349;ी मेरी चूत में घुसने के लिए मरा जा रहा था. हम अपने अलग ही, चुदाई के संसार में थे और हमारा पूरा धयान चुदाई पर ही था, हम चुदाई में ही मगन थे. उस ने मेरी दूसरी चूची को चूसने के लिए फिर अ&# 2346;नी पोजीसन बदली. जो निप्पल पहले मसली जा रही थी वो अब चुसी जा रही थी और जो पहले चुसी जा चुकी थी वो अब मसली जा रही थी. उस छोटी सी कार में चुदाई का तूफ़ान उठ रहा था और बाहर बरसात हो रही &# 2341;ी. किसी को पता नहीं था की वहां एक कार है और कार में हम चुदी चुदी खेल रहे थे.

उस का एक हाथ मेरे पैरों के जोड़ की तरफ बढ़ा तो मैंने अपने पैर थोड़े चौड़े कर लिए ताकि वो मेरी सफाचट, चि 25;नी चूत पर आराम से हाथ फिरा सके. हात फिराते फिराते उस की बीच की ऊँगली मेरी गीली फुद्दी के बीच की दरार में घुस गई. वो अपनी ऊँगली मेरी चूत के बीच में ऊपर नीचे मेरी चूत के दाने को मसल& #2340;ा हुआ घुमा रहा था. चूची चुसवाने से और चूत में ऊँगली करवाने से मेरे मुंह से सेक्सी आवाजें निकलने लगी. उस के मुंह में मेरी निप्पल और मेरे हाथ में उस का लंड, दोनों और कड़क हो गए. मैæ 6; भी उस का लंड चुसना चाहती थी और 69 पोजीसन के बारे में सोचा मगर कार में ये संभव नहीं था. मेरी चूत में उस की ऊँगली लगातार घूम रही थी और मैं संतुष्टि के स्टेशन की तरफ बढ़ने लगी. उस की ऊæ 5;गली अब मेरी चूत में घुस कर चुदाई कर रही थी. मेरी फुद्दी को उसकी ऊँगली चोद रही थी. जैसे ही उस को पता चला की मैं पहुँचने वाली हूँ, उस ने मेरी चूत की चुदाई अपनी ऊँगली से जोर जोर से करन ी शुरू करदी. वो मेरी चूत को अपनी ऊँगली से इतनी अच्छी तरह से, सेक्सी अंदाज़ में चोद रहा था की मैं झड़ने वाली थी और मरी नंगी गांड अपने आप ही हिलने लगी. मेरे मुंह से जोर से संतुष्टि  25;ी आवाज निकली और मैं झड़ गई. मैंने उसकी ऊँगली को अपने पैर, गांड और चूत टाईट करके अपनी चूत में ही जकड़ लिया और झड़ने का मज़ा लेने लगी.

आखिर मैंने उस से कह दिया की मैं उस के गरम लंड क ो चखना चाहती हूँ. मैं उस को इतना गरम करना चाहती की उस के लंड का पानी मेरी चूत में जल्दी ही बरस जाए. मैं उसको भी अपने अगले झड़ने के साथ झाड़ना चाहती थी. इस के लिए जरूरी था के मैं उस क& #2379; चुदाई के आधे रास्ते पर चूत की चुदाई शुरू करने के पहले ही ले जाऊं.

हम ने फिर अपनी पोजीसन बदली और वो कार की पेसेंजर सीट पर अधलेटा हो गया और मैं ड्राइविंग सीट पर आ गई. उस का गरम, लम 81;बा, मोटा और पूरी तरह तना हुआ चुदाई का सामान लंड कार की छत की तरफ मुंह कर के खड़ा हुआ था जिस का नीचे का भाग मैंने अपने हथेली में पकड़ा. उस के लंड का सुपाडा पहले से ही बाहर था जिस को ë 0;ैंने सीधे अपने मुंह में ले कर चुसना शुरू कर दिया. हे भगवान्, कितना गरम लंड है उसका. मैंने उस के लंड से बाहर आते पानी को चखा और अपनी जीभ उस के लंड के सुपाड़े पर घुमाने लगी. मेरा हाथ उस के लंड को पकड़ कर धीरे ऊपर नीचे होने लगा. मैं ड्राईवर सीट पर अपने घुटनों के बल बैठ कर, झुक कर उस के लंड को चूस रही थी, और मेरी नंगी गांड ऊपर हो गई थी. ये उस को खुला निमंत्रण था. उस न 75; अपना हाथ मेरी गोल नंगी गांड पर घुमाते हुए फिर से मेरी टाईट गांड में अपनी ऊँगली डाल दी. मैं उस को उस को उस का लौड़ा चूस कर, मुठ मार कर गरम कर रही थी और वो मुझे मेरी गांड में अपनी ऊँè 7;ली धीरे धीरे अन्दर बाहर कर के गरम कर रहा था. रमेश को गांड मारना पसंद नहीं था पर मेरी गांड में ऊँगली करना उस को हमेशा अच्छा लगता था, और सच कहूँ तो मुझे भी बहुत अच्छा लगता था. उस की म ेरी गांड में घूमती ऊँगली मुझे चुदवाने के लिए बेचैन कर रही थी. रमेश एक बहुत अच्छा चुद्दकद है और मैं खुश हूँ की वो मेरा होने वाला पति है.

मेरी उस के लंड की धीरे धीरे चुसाई और धीरे धीरे मुठ मारे अब तेज हो चली थी. मेरी दोनों चूचियां हवा में लटक रही थी और आगे पीछे हिल रही थी, मेरी गांड में उसकी ऊँगली भी बराबर घूम रही थी.

जब मैंने महसूस किया की मैं उस को उसके ल 306;ड की चुसाई से और मुठ मार कर आधे रास्ते टक ले आई हूँ और अब चूत और लंड की चुदाई में हम साथ साथ झड़ सकतें है, तो मैंने उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.

वो पेसेंजर सी ;ट पर उसी तरह अधलेटा था और उस ने मुझे उसी पोजीसन में अपने ऊपर आने को कहा. मैं उस पर लेट गई. मेरी पीठ उस की छाती पर थी और उस का खड़ा हुआ चुदाई का औजार, उस का लंड मेरी गांड के नीचे था. उस क&# 2375; दोनों परों को मैंने अपने दोनों परों के बीच में ले कर चुदाई की पोजीसन बनाई. एक हात से मैंने मैंने कार के दरवाजे के ऊपर के हँडल का सहारा और saport लिया और मेरा दूसरा हाथ ड्राईवर सीट क&# 2375; ऊपर था. मैं अब उस के लंड पर सवारी करने को तैयार थी. अपने दोनों हाथो के support से मैंने अपनी गांड ऊपर की तो उस का लंड राजा मेरी गीली, गरम और चिकनी चूत के नीचे आ गया.

हम इस तरह की अधलेटी पो& #2332;ीसन में पहली बार चुदाई करने जा रहे थे और वो भी कार में. ये एक यादगार चुदाई होने वाली थी.

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Jun 11, 2016

Hindi pados ki chudai Sex Stories पड़ोसन को बिर्य चखाया

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नमस्कार मित्रो, मेरा नाम अभय हैं और मैं आज आप को अपनी गरम पड़ोसन उर्मिला Hindi pados ki chudai Sex Stories sex with girl next door . xvdeos indian sex video . best sex stories of 2016 colletions  की बात बतानें जा रहा हूँ. वैसे उर् ;मिला आंटी कहना ही ठीक हैं क्यूंकि वो मुझ से 10 साल बड़ी हैं, करीब 30 की. उसका एक बेटा हैं जो 4 साल का हैं. उसका पति अविनाश एक कंपनी में नाईट शिफ्ट करता हैं. उर्मिला आंटी को सोसायटी में आ 351;े हुए कुछ 3 हफ्ते हुए थे तब की यह बात हैं. उनका मकान मेरी बिलकुल बगल में हैं इसलिए वो कभी कभी मुझे कुछ छोटे मोटे काम दिया करती थी.

उस वक्त रात के कुछ 8:30 बजे थे लेकिन ठंडी होने की वजह से सोसायटी में कोई बहार नहीं था. मैं अपने घर से बहार निकला और दोस्तों के पास जाने के लिए चल पड़ा. तभी पीछे से आवाज आई, “अभय, बाजार जा रहें हो क्या?”

मैं मुड के देखा की उर्मिला आंटी  309;पने दरवाजे से बाहर निकल के खड़ी थी. उसने नीले रंग की नाईट गाउन पहनी थी. साला पूरा शहर ठंडी के चलते गांड में ऊँगलीडाल के सोता था एयर मेरी यह पड़ोसन सिर्फ नाईट गाउन में? सच में उसका & #2344;ाम गरम पड़ोसन रखना उचित ही था.

मैं: हाँ, मैं नुक्कड़ में जाऊँगा.

उर्मिला: मुझे दूध की थेली ला दोंगे? अविनाश नहीं लाये थे आज और वो जॉब पे चले गए.

उर्मिला ने मुझे 20 का नोट दिया और मैं &# 2350;न में गालियाँ देते ही नुक्कड़ की और बढ़ा. रस्ते में मुझे उर्मिला आंटी की चौड़ी छाती के ही विचार आ रहे थे. मैं आज से पहले कभी भी उसे नाईट गाउन में नहीं देखा था, और साडी में उसकी वो बड़ì 8; चुंचियां जैसे छिप जाती थी. मेरे लंड में हलचल हुई कुछ, हालांकि मैंने शाम में ही मूठ मारी थी. मैं यही ख्यालों में दूध ले के भी आ गया. कमरे पे नोक करते ही उर्मिला उठ के आई. उसने दरवाज ा खोल के दूध लिया और बोली, “आओ अभय चाय पीते हैं.”

मैं सोचा की ठंडी में चाय का न्योता कौन ठुकरायें, लेकीन मैंने फिर भी ना कहा.

उर्मिला आंटी: अरे आओ ना वैसे भी हम दोनों ही हैं, मुन् 44;ा सो गया हैं मुझे भी बोर लग रहा हैं.

उसकी बातों में एक खिंचाव था जैसे की. मैंने जूते निकालें और अंदर आ गया.

उर्मिला आंटी की वो नीली गाउन देख के लंड जैसे जींस फाड़ने को उतारू हुआ  341;ा. मुझे अभी सभी गरम पड़ोसन आंटी और भाभी की स्टोरी याद आ रही थी जैसे. उनका कमरा छोटा था और किचन भी साथ में ही था. आंटी किचन में चाय बना रही थी और मेरा ध्यान उनकी गांड पे ही था. 5 मिनिट म& #2375;ं वो चाय के दो कप ले आई. उर्मिला आंटी मेरी बगल में ही आके बैठ गई, और उनका कूल्हा मुझे टच भी कर गया. क्या मस्त ठंडी ठंडी गांड थी आंटी की. उन्होंने मुझे चाय दी और बातें करने लगी.

आंट 368;: अभय तुम बड़े अच्छे लड़के हो, मुझे बहुत हेल्प करते हो. मैं अक्सर अविनाश से तुम्हारें बारे में बात करती हूँ.

मैं: थेंक्स, पड़ोसियों को काम करना तो अच्छी बात हैं ना. वैसे अविनाश अंक&# 2354; को नहीं देखा मैंने कभी भी. वो कहाँ काम करते हैं.

उर्मिला: हा हा हा, अरे अविनाश को कभी कभी मैं भी नहीं देख पाती हूँ. वो शादी के तिन महीने के बाद से ही नाईट में लगे हुए हैं. मुन्ना कब & #2348;ड़ा हुआ वो भी उन्हें पता नहीं हैं.

मैं: तो ऐसे तकलीफ नहीं होती हैं.

आंटी: तकलीफ औरत को नहीं होंगी तो और किसे होंगी लेकिन कहाँ जाएँ किसे दुखड़े सुनाएँ.

मैं: अरे आंटी आप को कभी भी ह ेल्प की जरुरत हो मुझे बताएं. मैं आप कहेंगी वो कर दूंगा, आप दुखी ना हो.

आंटी ने हंस के कहा, “बाबू हर एक चीज के लिए तुझे थोड़ी बूला सकती हूँ.”

आंटी के हाथ लगाते ही लंड खड़ा हुआ

उसकी य 61; बात सुन के तो लंड और भी टाईट हो गया. हम दोनों धीरे धीरे चाय पी रहे थे. तभी आंटी को जैसे झटका लगा और उसकी चाय धुल के मेरी जांघ के ऊपर आ गिरी. वैसे एक दो बूंद ही गिरी इसलिए मैं जला नही 306;. आंटी तुरंत उठ खड़ी हुई, “सोरी अभय मैं पीछे मुड़ी और चाय गिर गई.”

आंटी निचे बैठ के अपने हाथों से मेरी जींस के ऊपर से चाय को साफ़ करने लगी. तभी मेरी नजर उसके गले के निचे पड़ी. उसकी दूध  32;ैसे सफ़ेद चुंचियां हाथ के हिलने से इधर उधर हो रही थी. मेरा लंड और भी टाईट हो गया और शायद उर्मिला आंटी ने भी यह देखा. उसने मेरी और देखा और मुझे उसकी चुंचियां घूरता पाया. उसने मेरी &# 2332;ांघ पे हाथ मारा और बोली, “तुम तो बड़े बदमाश निकले.” उसने अपने हाथ चुन्चों को छिपाने के काम में लिए और उठ गई. वो फिर से सोफे पे आ बैठी और बोली, “क्या देख रहे थे?”

मुझे लगा की वो भड़क ग 312; हैं. मैंने कहा, “कुछ भी तो नहीं.”

आंटी ने तिरछी नजर से मुझी देखा और बोली, “मुझे पता हैं तुम क्या देख रहे थे अभय, अब इतने भोले क्यूँ बन रहे हो.”

मैं निचे देखने लगा शर्म के मारे. तब  10;ंटी बोली, “अरे घबराओ मत, देख लिया तो देख लिया. लेकिन तारीफ़ भी नहीं की.”

मैं आंटी की और देखां और वो हंस रही थी. उसने आँख मारी और बोली, “अविनाश नहीं हैं उसमे मुझे सब से बड़ी अड़चन प्या र में आती हैं, क्या तुम मुझे मेरे हिस्से का प्यार दे सकते हों.”

बाप रे….यह गरम पड़ोसन तो चूत मरवाने की बात बिलकुल रोमांटिक अंदाज में कर रही थी. मैं फिर भी उल्लू बनने का नाटक करता ; रहा.

मैं: मैं समझा नहीं आंटी जी.

आंटी: आओ मैं तुम्हे समझाऊं.

इतना कह के उसने सीधे ही अपनी गाउन को कमर के पास से उपर की और उठा ली. उसने अंदर कोई ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसके बड़े बड़&# 2375; सफ़ेद चुंचे मेरे सामने नंगे हो गए. मैं अभी भी जैसे कोई सपना देख रहा था. उर्मिला आंटी ने मेरे हाथ को पकड के अपनी चूंचियों पे रखा और बोली, “यही देख रहे थे ना तुम अभय. ये लो अभी जो करन 366; चाहते हो करो इनके साथ.” मेरी तो जैसे की लोटरी लग गई. मैं आंटी की चुंची को अपनी हथेली में दबाई, लेकिन इतनी बड़ी चुंची मुश्किल से हाथ में आ रही थी. आंटी के स्तन को दबाते ही उसकी आह नì 7;कली और उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से दबाया. उर्मिला आंटी ने अब अपना हाथ बढ़ा के मेरे लंड को सहला दिया और वो बोली, “यह तो पहले से ही खड़ा हो के बैठा हैं. लगता हैं मेरी चुंचियां देख के ह ी खड़ा हो गया था यह.”

आंटी ने गाउन के निचे लंबी बरमूडा पहनी थी. मैं उसकी चुंचियां दबाते हुए उसके नाड़े को धीरे से खोला. बाकी का काम आंटी ने संभाल लिया. उसने अपनी गांड के उपर से धीरí 5; से उस बरमूडा को निचे सरकाया. माय गॉड कितनी सेक्सी लग रही थी उसकी चिकनी चूत. लगता था जैसे इस गरम पड़ोसन ने सभी कुछ प्लान किया हुआ था. उसकी चूत के उपर एक भी बाल नहीं था, जैसे की उसे पत ;ा हो की मैं उसे चोदुंगा. आंटी ने मेरा हाथ ले के अपनी चूत पे रख दिया और बोली, “अभय क्या तुमने कभी सेक्स किया हैं?”

मैं: किया हैं ना, अपनी गर्लफ्रेंड को कितनी बार चोदा हैं मैंने.

आ 06;टी: कभी बड़ी उम्र वाली औरत से सेक्स किया हैं तुमने?

मैं: नहीं.

आंटी ने अपनी चूत के अंदर ऊँगली डाल के निकाली और मुझे सुंघाई. फिर वो बोली, “अभय असली मजा तो वही मिलता हैं लोगों को. आं& #2335;ी और भाभी से सेक्स सिखा जाता हैं और लड़कियों पे आजमाया जाता हैं. आजा मेरी चुंचियां चूस ले.”

इतना कह के उसने अपनी दोनों चूंचियों को साथ में मिला के दबा दी. ऐसा करने से दोनों स्त&# 2344; एक दुसरे के करीब आ गए. मैंने आंटी की बड़ी बड़ी निपल्स को अपने मुहं में भर ली और बारी बारी उन्हें चूसने लगा. आंटी ने अपने चुंचे ऐसे ही दबाये रखे और वो मुझे चूसने में मदद कर रही थी. म 75;रा लंड अब जींस को फाड़ने की कगार पे था. मैंने आंटी की चुंचियां चूसते हुए ही पेंट की क्लिप खोल दी. मैंने पेंट और अंदर की अंडरवेर चूस्सा लगाते हुए ही निकाल फेंकी. आंटी मेरे लंड को  342;ेख के पगला सी गई.

आंटी: वाऊ अभय कितने इंच का हैं तेरा.?

मैंने मुहं को चुंची से दूर कर के कहा, “बस आठ इंच का हैं आंटी जी.”

आंटी अपनी चुंचियां छोड़ के घुटनों पे आ बैठी और बोली, “अब इसí 5; चूसने का कितना मन हो रहा हैं मुझे यह कैसे बताऊँ तुम्हे.”

मैं: फिर चूस लीजिए ना रोका किसने हैं आप को.”

इतना सुनते ही आंटी ने अपना मुहं खोला और जैसे वो किसी ब्रांडेड आइसक्रीम क ो आँख बंध कर के खाने लगी. सुपाडे के बाद लंड के डंडे को भी उसने आधा अपने मुहं में ले लिया. उसकी जबान मेरे सुपाडे के ऊपर रेंग रही थी और उसके हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ थे. आंटी ने फिर ए& #2325; ही पल में मेरे लंड को गले तक भर लिया और वो अपने मुहं को आगे पीछे करने लगी. मेरा लंड आंटी के मुहं में अंदर बहार हो रहा था. उसने बड़ा सही दबाव बना के रखा था मेरे लंड के ऊपर.आंटी ने पूर& #2368; पांच मिनिट मेरे लंड को ऐसे ही दबा दबा के चूसा. मेरी मलाई निकल के एआंटी के मुहं में ही निकल पड़ी. मेरे आश्चर्य के बिच आंटी ने सभी कुछ अपने गले के निचे उतार लिया. फिर उसने लंड को अप 44;ी जबान से चाट चाट के एकदम साफ़ कर डाला.

आंटी: देखों पहला लेसन, पहली बार झड़ जाओ तो दूसरी चुदाई लंबी होती हैं. आओ अब फिर से मुझे चुंचो में चुम्मे दो थोड़ी देर तब तक तुम्हारा लंड भी टा& #2312;ट हो जायेंगा.

मैंने आंटी की बात को मानते हुए अपने मुहं को वापस उसके चुंचो में घुसेड दिया. आंटी ने अपने चुंचे खड़े कर के सही तरह से चुसाए. फिर उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ के मलना चालू कर दिया. लंड ढीला पड़ा था जैसे की उसमे जान नहीं थी. लेकिन आंटी ने दो चार बार हाथ चलाये और उसमे जैसे की धीरे धीरे जान आने लगी. आंटी ने अब लंड को जोर जोर से हिलाना चालू कर दिया और मैं भी आंटी के चुंचे जोर से चूस रहा था. आंटी ने लंड को फिर से टाईट कर दिया. तभी उसके मुन्ने ने नींद में रोना चालू कर दिया. आंटी मेरे लंड को छोड़ के उसके मुन्ने के पास गई और उसे ठपठपा & #2325;े सुलाने लगी. उस वक्त आंटी आगे झुकी थी और उसकी मस्त चौड़ी गांड पीछे से दिख रही थी. मैंने अपनी टांग लंबी कर के उसके छेद पे पीछे से पाँव का ऊँगल मारा. आंटी ने मुड के देखा और वो हंसने  354;गी. मैंने ऊँगली को उसकी चूत के छेद पे रख के हिलाई और देखा की आंटी की चूत गीली हो चुकी थी और उसमे से पानी निकल के होंठो में आ चूका था. आंटी ने मुन्ने को छोड़ के अब वापिस मेरे लंड के ऊ 46;र हमला कर दिया. उसने अब लंड पकड के खिंचा और बोली, “मुन्ना मुश्किल से सोया हैं, चलो किचन में ही चलते हैं.”

भला मुझे क्या दिक्कत हो सकती थी, यह गरम पड़ोसन चूत दे दे बस फिर जो कहें मैं करने के लिए राजी था. कहें तो मैं आंटी का गुलाम भी बन सकता था. आंटी अपनी गांड को मटकाते हुए चल पड़ी मेरे लंड को हाथ में लिए. किचन में आते ही आंटी ने प्लेटफोर्म पकड लिया और वो थोड़ी आग&# 2375; झुकी. मैंने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और आंटी के छेद पे सेट कर दिया. आंटी ने भी मेरी मदद की और खुद अपने हाथ से छेद मिलाया.

आंटी: अभय मार दो अपनी इस प्यासी आंटी की चूत को. ठोको अंदर अप&# 2344;ा लंड, पुरे 3 महीने के बाद मुझे आज यह सुख मिलेंगा.

आंटी की बात सुन के मैं तान में आ गया. मैंने जैसे ही एक जोर का झटका मारा आंटी की चूत में मेरा लंड पूरा घुस गया. आंटी की चूत बहुत ही च& #2380;ड़ी थी लेकिन लंड को अंदर बड़ा ही मजा आ रहा था. जैसे ही लौड़ा अंदर गया आंटी ने फट से अपनी चूत को कस लिया. मेरा लंड आंटी के बूर में टाईट हो गया. मैंने एक हाथ से आंटी के चुंचे पकडे और दुसर& #2375; हाथ से प्लेटफोर्म, और लग गया अपने लंड को चूत के अंदर बहार करने. आंटी और थोड़ी झुकी और बोली, “अभय पहले आराम आराम से करो, जल्दी करोंगे तो निकल जायेंगा वीर्य. मुझे आज लंबी चुदाई करन ;ी हैं तुम्हारें साथ.”

मैंने आंटी ने जैसे कहा वैसे पहले धीरे धीरे झटके मारे और अपने लंड को चूत की गर्मी के सामने एडजस्ट किया. 5 मिनिट हौले हौले हुई चुदाई के बाद आंटी बोली, “बस अभ ;य अब चोदो जितना जोर से मुझे चोदना चाहों. फाड़ दो मेरी चूत को आज अपने आठ इंच के लौड़े से. और खबरदार एक भी बूंद बहार मत निकालना मेरी चूत में अपने पानी की सिंचाई कर डालो.”

बस इतना सुन 44;ा था की मैंने अपने लंड को आंटी की चूत के अंदर जोर जोर से मारना चालू कर दिया. आंटी भी जोर जोर से अपनी गांड को हिला के लंड का सामना कर रही थी. आंटी की हिलती गांड देख के मैंने चुंचे छो ;ड़ दोनों हाथ से गांड पकड ली. मैं गांड को आगे पीछे कर के अपने लंड को चूत में अंदर बहार दे रहा था. आंटी के मुहं से आह ह्ह्ह्ह ओह ओह अभय्य्य्यय्य्य्य जोर स्स्स्से और जोर जोर से चोदो  50;ुझे….आह तेराआआआअ लंड कित्नाआआआआ बड़ा हैं…….आह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह ह्ह्हह्ह्ह्….ऐसी आवाजें निकलने लगी. मैं अपने लंड को पूरा निकाल के फिर से आंटी की चूत में डालने लगा. आंटी जो& #2352; जोर से अपनी गांड को हिला हिला के मुझ से ऐसे ही 20 मिनिट तक चुदती रही.

आंटी की गांड की भी बारी आई

फिर मैंने अपने लंड को स्लो किया और बोला, “उर्मिला आंटी मुझे आप की गांड मारनी हैं&hell ip;!”

उर्मिला: कोई बात नहीं आज तेरे लिए सब छेद खुलें हैं मेरे जहाँ चाहें डाल दे. लेकिन पूरी रात मुझे चोदना पड़ेंगा.

आंटी ने प्लेटफोर्म को छोड़ा और वो निचे लेट गई. आंटी की गांड को मै 06;ने अपने दोनों हाथों से फैलाया और अपने लंड को धीरे से उसमे रख दिया. आंटी की गांड के छेद पे लंड सेट था. गांड का छेद बड़ा सख्त था. आंटी ने अपने हाथ में थोडा सा थूंक लिया और उसे गांड पे ë 0;ला. फिर उसने अपने हाथ से लंड को छेद पे पकडे रखा. मैंने एक झटका मारा लेकिन लंड का केवल सुपाडा अंदर घुस पाया. और उतने में ही आंटी की चीख सी निकल पड़ी. मैंने सुपाडे को ऐसे ही रहने दिया और पड़ा रहा. पूरी दो मिनिट के बाद फिर मैंने एक झटका दिया और अन की आधा लंड गांड में पेल दिया. आंटी ने अब गांड को छोड़ा और बोली, “अभय पीछे धीरे धीरे ही करना नहीं तो मुझे बहुत दर्द होंग 366;.”

मैंने आंटी की गांड में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बहार करना चालू किया. अभी भी मैं आधे से ज्यादा लंड को अंदर नहीं डाल रहा था. उर्मिला आंटी आह आह करते हुए लंड के झटके ले रही थी. ए ;क मिनिट और ऐसे आधे लंड से पेलने के बाद मैंने एक झटके में आंटी की गांड में पूरा लंड भर दिया. आंटी की आह निकल पड़ी. एक मिनिट ऐसे ही पड़ा रहा फिर से मैं अंदर लंड रखे हुए. और फिर आंटी बोली , “चल अभय अब हिला अपना लंड मैं रेडी हूँ.”

फिर क्या कहना बाकी था. मैंने अपने लंड को आगे पीछे करना चालू कर डाला आंटी की बुंड में. आंटी आह आह कर के धीरे से अपने कूल्हों को हिलाती रही  324;र मैं अपने लंड को उसके छेद में ठेलता रहा. बस दो मिनिट ही चल सका यह खेल; मेरा लंड फिर से जवाब जो दे गया. ढेर सारा वीर्य इस गरम पड़ोसन की गांड में ही निकल गया. जैसे मैं अपने लंड को निका 354;ा मैं देखा की उसकी गांड से वीर्य की बुँदे टपक रही थी. मैं अब घर जाना चाहता था क्यूंकि मैं दो बार के स्खलन से थक चूका था.

मैं: चलिए आंटी मैं जाता हूँ, फिर आ जाऊँगा कभी मैका मिला तो.

< p>उर्मिला आंटी: और जो मौका अभी हैं उसे क्यूँ ठोकर मार रहे हो. तुम यही रात रुक जाओ ना.

मैं: आंटी मेरी मोम फ़िक्र करेंगी.

आंटी: अरे जा के कह दो की दोस्त के वहां जा रहा हूँ, सुबह आऊंगा. फि ;र मेडिकल से जा के एक गोली वाएग्रा की ले आओ. तुम्हे रात में मजा ना कराऊँ तो कह देना.

और जैसे इस आंटी ने कहा मैं घर जा के बहाना बना के मेडिकल गया. वहां से मैंने गोली ली और वापिस आंटी & #2325;े घर आया. उस रात इस गरम पड़ोसन ने मुझे सच में बड़े मजे करवाएं. तिन बार चुदाई हुई और दो बार मैंने इस हॉट पड़ोसन की गांड में डंडा किया. जल्दी सुबह उसने मुझे उठा के अपने घर से निकाला. और &# 2313;स रात के बाद तो मैं उर्मिला आंटी के घर अक्सर रात बिताने लगा हूँ. आंटी सच में मुझे चुदाई के नितनए तरीके बताती हैं. तो आप को कैसी लगी मेरी गरम पड़ोसन? फेसबुक पे और ट्विटर पे हमारी क हानी को शेयर कर के आप भी चुदाई के नाम एक सलाम जरुर भेजें…..!

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Jun 10, 2016

Hindi Sex Stories in hindi font माँ को सिर्फ लंड से मतलब था

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Hindi Sex Stories in hindi font माँ को सिर्फ लंड से मतलब था हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है और आज best Hindi Sex Stories in hindi font top indian hindi chudai kahani 2016 Indian Sex Chudai में एक बार फिर से आप सभी लोगों के लिए अपनी एक और  360;च्ची कहानी लेकर आया हूँ जिसमे एक बार फिर से मेरी चुदक्कड़ माँ मेरे एक दोस्त से चुदी और उसके साथ बहुत मज़े किए. अब में वो सब कुछ थोड़ा विस्तार से आप सभी लोगो को…

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Jun 9, 2016

hindi top sex stories 2016 जीजा ने मेरी चूत मे गरम लंड डाली

hindi top sex stories 2016 जीजा ने मेरी चूत मे गरम लंड डाली

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hindi top sex stories 2016 जीजा ने मेरी चूत मे गरम लंड डाली सुबह ७ बजे हमारी नीद खुली, तो मैंने देखा कि जीजू एकदम नंगे- धंगे ड्रेसिंग टेबल के सामने अपने लंड की शेव करने में लè 7;े थे. मैंने देखा, कि लंड करीब ८.३ इंच से कम का नहीं था और मैं समझ नहीं पा रही थी. कि कैसे वो मेरी चूत में घुस कर हंगामा मचाकर समाया था और कैसे वो अपनी टोप से गरम वीर्य के गोले छोड़ गया. &# 2332;ीजू का लंड देख कर, मेरी उससे खेलने की…

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Jun 7, 2016

Top hindi sex stories 2016 धूमधाम चुदाई हुई ऑफिस के आंटी की

 Top hindi sex stories 2016 धूमधाम चुदाई हुई ऑफिस के आंटी की

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हैल्लो फ्रेंड्स.. मैंने नई जॉब जॉइन की थी और मेरी पोस्टिंग ग्रेटर नॉएडा के ऑफीस में हुई थी वहाँ पर करीब 25 लोगों का स्टाफ था.. करीब 5 लेडीस और 20 जेंट्स और में जेंट्स में सबसे कम उम्र का था. मेरी उम्र 22 साल थी.. वैसे कॉलेज के वक़्त मेरी कई गर्लफ्रेंड थी और बहुत बार सेक्स भी कर चुका था.. ë 4;ेकिन पिछले करीब 6 महीने से सूखा था और लंड महाराज को चूत के दर्शन नहीं हुए थे. लंड किसी चूत से मिलने को तड़प रहा था और मुठ मार के ही काम चलाना पड़ता था. में 5 लेडीस में सबसे छोटी उम्र ; वाली को सेट करने के चक्कर में था. सबसे छोटी वाली लड़की की उम्र 19 साल थी और एकदम कच्ची कली थी.. ऐसा लगता था कि उसकी तो सील भी नहीं टूटी होगी. मैंने सबसे पहले उसी पर लाईन मारना शुरू कì 7;या और उससे अच्छी दोस्तीं भी हो गई थी.

एक दिन उसका पीछा करते-करते में नॉएडा तक गया.. तो देखा कि वो तो हमारे मैनेजर के साथ लगी हुई है. साले दोनों कार को अंधेरे में खड़ा करके चुम्मा &# 2330;ाटी कर रहे थे और फिर सोचा की इस हसीना की चूत तो में नहीं मार सकता और उस कमसिन हसीना को छोड़कर मैंने 30 साल की औरत को सेट करने की ठानी.. वो पंजाबन थी और दिखने में एकदम मस्त शादीशुदा  341;ी और उसके एक बेटी भी थी. कुछ खास दोस्तों से पता चला कि उसकी और उसके पति के बीच में नहीं बनती है और वो काफी परेशान है. बस यही मौका तो में ताक रहा था. मैंने उससे दोस्ती की और काफ़ी सी 43;ा दिखना शुरू कर दिया और कुछ ही दिन बाद में उसका करीबी दोस्त बन गया.. वो अब मुझसे अपनी हर बात शेयर करती थी.

एक दिन हम सब लंच पर गये.. तो वो काफ़ी उदास थी. मैंने पूछा कि क्या हुआ.. तो वो र ो पड़ी मुझे लगा कि यही सही टाइम है उसके पास आने का और मैंने अपना कंधा आगे बढ़ा दिया. वो रोती जा रही थी और में उसे सपोर्ट कर रहा था. थोड़ी देर बाद वो चुप हुई.. तो मैंने कहा कि तुम्हारा पति तुम्हे क्यो नहीं पसंद करता.. अगर में होता तो तुम्हे देखकर हमेशा खुश रहता.. बस इतना कहना था कि वो इमोशनल ही हो गई और मुझसे लिपट गई. अब वक़्त था दूसरा कदम उठाने का मतलब सेक्स की  324;र बड़ने का.. मैंने उसे एक एडल्ट जोक भेजा और सोचा कि देखता हूँ उसका क्या नतीजा होता है. अगर कुछ गड़बड़ हुआ.. तो सॉरी कह दूँगा.. वो जोक ऐसा था कि अगर कोई नॉर्मल लड़की पढ़ ले.. तो मुझे थप्& #2346;ड़ ही मार दे. फिर वो कुछ देर बाद मेरे कैबिन में आई.. में कुछ डर तो गया था.. लेकिन वो बोली ये क्या भेजा है मैंने कहा जोक था और वो मुस्कुराने लगी मुझे लगा कि हँसी तो फंसी.

मैंने शाम को उसे लिफ्ट ऑफर की और उसे मेरे साथ कॉफी पीने के लिए कहा.. तो वो तैयार हो गई. हम नॉएडा गये हमने कॉफी पी और वो मेरी फैमिली और गर्लफ्रेंड के बारे में पूछती रही. मैंने कहा कि मेरी कोई गर 381;लफ्रेंड नहीं है उसने फिर पूछा कि कभी सेक्स किया है. मैंने कहा कि नहीं बस तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था.. वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी. अब मेरी भी हिम्मत बड़ने लगी थी. मैंने भी उसकी से क्स लाईफ के बारे में पूछा.. तो उसने कहा कि उसकी सेक्स लाइफ नॉर्मल नहीं है.. वो 2-3 महीने में एक बार सेक्स करते है.. उसका पति घर के बाहर रंडियों को चोदता है. मैंने कहा कि तुम क्यों नहीं  25;रती..

फिर ये सुनकर वो मेरी और अजीब से देखने लगी और कहा कि चलो.. मुझे लगा कि वो बुरा मान गई है खैर में चुप रहा और कार में बैठ गया. हम घर की और चल दिये.. हम घर पहुँचने ही वाले थे कि उसने का ;र एक सुनसान रास्ते की और मुड़वाई और वहीं रूकने को कहा तो मैंने कार रोक दी. एकदम अंधेरा और सुनसान रोड था.. उसने कार अंदर से बंद की और लाइट भी ऑफ कर दी.. वो मेरे करीब आई और बोली कभी किसी ; औरत को किस किया है.. तो मैंने कहा कि नहीं. वो मेरे और करीब आई और बोली तो फिर करो.

मैंने कहा मतलब.. तो वो बोली मुझे किस करो. मैंने जल्दी से छोटा सा किस कर दिया.. वो मुस्कुराई और बोली शा 351;द तुम सच कह रहे हो.. तुमने अभी तक किसी लड़की को नहीं छुआ है.. वो बोली में बताती हूँ कि किस कैसे करते है. उसने अपने दोनों हाथ मेरे होठों पर रख दिए और जीभ को अंदर बाहर करने लगी. वो ऐसे क& #2352; रही थी कि मेरा लंड एकदम तन गया और उसे चोदने को बेताब होने लगा. वो भी ये सब भांप चुकी थी. उसने कहा की अभी तो तुम मुझे नहीं चोद सकते हो.. क्योंकि घर जल्दी जाना है.. लेकिन में तुम्हे जल ्द ही जन्नत दिखाउंगी.

उसने मेरी चैन खोली और अंडरवेयर से लंड को बाहर निकाला.. तो लंड को देखकर वो बोली कि काफ़ी बड़ा है तुम्हारा लंड. फिर उसने लंड की खाल नीचे की.. फिर उसने प्यार सí 5; थप्पड़ मारकर बोला कि झूठ बोलते हो.. तुम्हारा लंड पहले भी चूत चोद चुका है. मैंने कहा हाँ एक दो बार.. फिर वो मेरे लंड को सहलाने लगी और फिर उसे मुँह में ले लिया और लंड को चूसने लगी.

में ; इतना ज्यादा उत्तेजित था कि कुछ ही देर में उसके मुँह में झड़ गया. उसने पूछा कि मज़ा आया.. तो मैंने कहा कि मज़ा तो आया.. लेकिन अधूरा. वो हँसी और बोली कि कल सुबह हम दोनों ऑफीस नहीं जाये ंगे और वो मेरे घर 9 बजे आ जायेगी और पूरे दिन हम साथ रहेंगे. फिर जितना चाहो चूत की पूजा और दर्शन करना.

मैंने फिर उसे घर छोड़ दिया और घर पहुँच कर में सुबह का ही इंतज़ार कर रहा था. में स& #2369;बह 6 बजे ही जाग गया और उसे फोन किया तो वो बोली कि अभी तो 6 ही बजे है. मैंने कहा कि बस जल्दी आ जाओ बस.. अब इंतजार ही नहीं हो रहा है. सुबह करीब 8:30 बजे बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला.. तो सामने  357;ो खड़ी थी.

उसने एक सिल्क की साड़ी पहन रखी थी और वो ग़ज़ब का माल लग रही थी. वो अंदर आई और बात करने लगी. में उसके पास गया और उसे किस करना शुरू कर दिया. उसने कहा कि आराम से और में किस किय&# 2375; जा रहा था. फिर में एक हाथ से उसकी निप्पल और दूसरे हाथ से उसकी चूत रगड़ रहा था. अब वो भी धीरे-धीरे गर्म हो रही थी. मैंने उसे बेड पर लेटाया और नंगा कर दिया.. फिर मैंने अपने भी सारे कपड़& #2375; उतार दिए. अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे और चोदन क्रिया को तैयार थे.

मैंने लंड को पकड़ा और उसकी चूत में लंड डाला.. काफ़ी टाईट चूत थी उसकी.. लगता था कि बहुत कम चुदी हुई है. में धीरे-धीर&# 2375; धक्के मार रहा था और वो भी धीरे-धीरे मधहोश हुये जा रही थी. उसकी चूत एकदम साफ थी.. मैंने पूछा कि बड़ी चिकनी है तेरी चूत.. तो वो बोली सुबह-सुबह तेरे लिए ही साफ की है.. वरना कल तो बालों से ; भरी हुई थी. अब मैंने धक्को की स्पीड बड़ा दी.. वो कहने लगी कि चूत के बाहर झड़ना.. वरना कहीं बाद में गड़बड़ ना हो जाये. में इतनी ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था कि साला लंड अंदर ही झड़ गयì 6;.. वो एकदम उठी और भागी और मूतने लगी. में बाहर खड़ा हो कर उसे मूतते हुए देख रहा था.

मैंने कहा कि इतनी जल्दी क्या थी मूतने की.. तो वो बोली ताकि बाद में ज्यादा गड़बड़ ना हो.. वो खड़े होकर  350;ेरे पास आई और मेरे लंड को पकड़कर बोली.. अब तो भूख मिट गई होगी तेरे लंड की. मैंने उसके दोनों बूब्स पकड़ लिए और दबाने लगा. पहला सेक्स किये हुये हमे 15 मिनट ही हुए थे और में दूसरे राउं 37; के लिये तैयार था. हम बाथरूम में ही थे.. में उसके पीछे गया और उसके बूब्स बहुत ज़ोर से दबाने लगा. उसके निप्पल रगड़ने में तो बहुत ही मज़ा आ रहा था. उसके बूब्स भी एकदम तन गये थे.

अब मैæ 6;ने उसे आगे की और झुकाया और पीछे से लंड उसकी चूत में प्रवेश कराया.. जैसे जैसे लंड अंदर जा रहा था वैसे वैसे उसकी सिसकियाँ तेज हो रही थी. में धक्के पर धक्के मारे जा रहा था और वो सिसक&# 2367;याँ लेती जा रही थी. लगभग 15-20 मिनट के बाद लंड झड़ने को तैयार था और इस बार मैंने लंड उसके बूब्स पर झाड़ दिया.

अब करीब 10 बजे थे. मैंने उससे कुछ नाश्ता बनाने को कहा और उसने ब्रेड-आमलेट ब ;ना दिया. मैंने वो खा लिया और अब 11 बज चुके थे.. मैंने उससे पूछा कि तुम क्या खाओगी? तो वो बोली जो तुम खिलाओ. मैंने कहा कि जेम रोल बनाकर खिलाता हूँ.. वो बोली कि ये क्या है? मैंने कहा थोड़ा इ& #2344;्तजार करो.. में किचन में गया और 2 मिनट बाद वापस आया. मैंने अपने लंड को पेपर से ढक रखा था.. वो बोली क्या है दिखाओ? मैंने पेपर हटाया और वो देखकर वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी. मैंने अपने लं ड पर जेम और बटर लगा रखा था. मैंने कहा कि नाश्ता तैयार है खा लीजिये.. वो हंसते हुए लंड को हाथ में लेकर चाटने लगी और फिर चूसने लगी.. क्योंकि हम 3 घंटे में 2 बार पहले ही सेक्स कर चुके थे.. इ&# 2360;लिये लंड अब जल्दी नहीं झड़ा. उसने आराम से लंड को चाटा और चूसा.. लेकिन लंड नहीं झड़ा.

अब फिर से बारी थी उसे चोदने की.. एक बार उसे डॉगी स्टाइल में चोदना था. वो डॉगी स्टाइल में बैठ गई.. & #2347;िर मैंने लंड चूत में ना डालकर उसकी गांड में डाल दिया.. अरे क्या ग़ज़ब का टाईट छेद था, मज़ा आ गया.. लेकिन उसकी तो चीख निकल गई. मैंने कहा कि कुछ देर सहन कर लो फिर मज़ा आयेगा. 10 मिनट चोदê 4;े के बाद लंड को उसकी गांड में ही झाड़ दिया. अब हम नहाकर कुछ देर बाहर घूमने मार्केट में गये. मैंने उससे कहा कि घर पहुँचकर और भी स्टाईल ट्राई करेंगे.. तो वो मुस्कुराने लगी.

उस दिन  361;म पहले ही 3 बार सेक्स कर चुके थे और घर पहुँचकर हमने 3 बार फिर से सेक्स किया और अब रात के 8 बज चुके थे और उसके घर जाने का टाईम हो चुका था. वो घर जाने लगी तो मैंने कहा कि एक बार आखरी बार औë 2; कर लो.. तो अब उसने मुझे लेटाया, मेरी चैन खोली और लंड निकाला. उसने अपनी पेंटी उतारी साड़ी ऊपर की और वो लंड पर बैठ गई. अब हम कपड़े पहनकर ही सेक्स कर रहे थे.. वो लंड चूत के अंदर लेकर उछले &# 2332;ा रही थी. कुछ देर बाद में झड़ गया.. लेकिन कुछ बूंदे उसकी साड़ी पर भी गिर गई. उस पूरे दिन हमने 7 बार सेक्स किया और शाम तक में पूरी तरह से थक चुका था. मैंने 2 ग्लास जूस पिया. फिर कुछ जान मे 06; जान आई.. उसके बाद हमने ना जाने कितनी बार सेक्स किया.

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Jun 6, 2016

best Hindi sex stories 2016 फटा चूत निकला खून

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 best Hindi sex stories 2016 फटा चूत निकला खून नमस्कार, मेरा नाम अमित गौर है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ और एक सरकारी नौकरी कर रहा हूँ। top hindi sex stories , indian sex stories in hindi font, virgin sex stories of indian girl ये मेरी असली कहानी है… …  348;ात उन दिनों की है, जब मैं कॉलेज में पढ़ रहा था। मैं दिल्ली से इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और वहाँ पर हॉस्टल में…

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Jun 6, 2016

big mamme muslim beautiful call girls images

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Jun 6, 2016

indian heroin Deepika real nangi pics leaked 2016

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